• साहित्य और सिनेमा


    शालिनी सिंह


    Designation : शोधछात्रा, हिंदी विभाग, इलाहाबाद विष्वविद्यालय, इलाहाबाद


    Journal Name : Reserach maGma




    Abstract :
    सिनेमा 20वीं सदी की सर्वाधिक चमत्कारिक उपलब्धि और वर्तमान में सर्वाधिक लोकप्रिय कला माध्यम है। सिनेमा अर्थात् चलचित्र का अर्थ उस चित्र से है जो पर्दे पर गति के साथ मौजूद हो किसी गतिमान चित्र का मुख्य बिंन्दु उसकी गाते ही है। प्रसिद्ध इतिहासकार बी0डी0 गर्ग ने कहा है, लगभग 25 हजार वर्ष पूर्व सभ्यता के पूर्वार्द्ध में किसी अनजान चित्रकार ने एल्टामिर स्पेन की गुफाओं में बहुत से पैरों वाले सुअर का भित्ति चित्र बनाया था जो षायद मनुष्य का प्रथम प्रयास था जिसमें चित्र को गति के साथ प्रस्तुत गया था।1 इन चित्रों को और गतिषीलता प्रदान करने की दिषा में सर्वाधिक महत्वपूर्ण प्रयास फ्रांस के ल्यूमियर बंधुओं को जाता है। यद्यपि सिनेमा की उत्पत्ति पष्चिम के देषों में हुई किंतु भारत को इसके आगमन के लिये अधिक प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ी। 7 जुलाई, 1896 को सायंकाल में मुम्बई के वाटसंस होटल में सर्वप्रथम चलती फिरती फिल्मों का प्रदर्षन किया गया। भारत की प्रथम कथाफिल्म राजा हरिष्चंद्र का प्रदर्षन 3 मई 1913 की बम्बई के कोरोनेषन सिनेमाघर में हुआ। इस पहली फिल्म की विषयवस्तु, एक साहित्यिक कृति भारतेन्दु हरिष्चंद्र कृत सत्य हरिष्चंद्र ही बनी।


    Keywords :
    सिनेमा, 20वीं सदी, साहित्य


    Reference :
    1. फिल्मफेयर, मार्च 8, 1963, पृ0 15 2. सिनेमा और समाज, विजय अग्रवाल 3. सिनेमा और साहित्य का अंतःसंबंध, डाॅ0 चंद्रकांत मिसाल पृ0 29 4. डाॅ0 श्रीराम लागू, सिनेमा और समाज, विजय अग्रवाल, पृ0 60 5. सिनेमा और साहित्य का अंतःसंबंध, डाॅ0 चंद्रकांत मिसाल, पृ0 28

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