• महाकवि भृर्तहरि के नैतिक एवं लोक व्यवहारिक विचारों की उपयोगिता का अध्ययन


    डाॅ. महेश चन्द यादव


    Designation : प्राचार्य श्री श्याम षिक्षक प्रषिक्षण महाविद्यालय तिजारा, अलवर


    Journal Name : Reserach maGma




    Abstract :
    षिक्षा के क्षेत्र में निरन्तर प्रगति हो रही है षिक्षितों की संख्या में भी निरन्तर वृद्वि हो रही है। अनेक कला कौषलों के विकास के साथ-साथ मनोविज्ञान और तकनीकी के विविध प्रयोगांे द्वारा षिक्षा को अधिकाधिक वैज्ञानिक बनाने का प्रयास सतत् चल रहा है तथा सफलता भी मिल रही है। इतना सबकुछ होते हुए भी समाज में बढते जा रहे हिंसा, द्वेष, अराजकता, पापाचार आदि असामाजिक तत्वों को देखकर मन में बहुत क्षोभ होता है और इसका मूल कारण पष्चिमी संस्कृति से लगाव और अपने शाष्वत नैतिक आदर्षों तथा प्राचीन भारतीय संस्कृति से विमुख हो जाना प्रतीत होता है।


    Keywords :
    महाकवि भर्तृहरि, साहित्य, नैतिक एवं लोकव्यवहार, अध्ययन


    Reference :
    1. भृर्तहरि:भृर्तहरि शतक मनोज पब्लिकेषन्स, 761, मेन रोड़, बुराड़ी, दिल्ली-2001 2. भृर्तहरि: नीतिषतक, अजमेरा बुक कम्पनी, जयपुर 1991 3. मेकेंजी जे.एस. : नीति प्रवेषिका, राज कमल प्रकाषन, प्राइवेट लिमिटेड, दिल्ली 1964 4. पाण्डे गोविन्द चन्द्र: मूल्य मीमांसा राजस्थान हिन्दी ग्रन्थ अकादमी, जयपुर। 5. राय पारसनाथ: अनुसंधान परिचय, लक्ष्मीनारायण अग्रवाल, आगरा 1989

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