• उत्तर प्रदेश में ग्रामीण विकास की कठिनाइंया एवं रणनीतियाँ


    डाॅ0 उमंग अग्रवाल


    Designation : वरिष्ठ लिपिक, महाराणा प्रताप राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय बिल्सी बदायू्ॅ।


    Journal Name : Reserach maGma




    Abstract :
    उत्तर प्रदेष प्राकृतिक एवं मानव सम्पदा आदि की दृष्टि से एक धनवान एवं सम्पन्न प्रदेष है, किन्तु विविध प्रकार की सम्पदा का असीम भण्डार होने के वावजूद भी आज उत्तर प्रदेष पिछड़े हुए प्रदेषों में प्रथम स्थान पर है। आर्थिक पिछड़ेपन के कारण उत्तर प्रदेष की आम जनता विशेषकर ग्रामीण समाज भी गरीबी, भुखमरी, बेकारी, भ्रष्टाचार, असुरक्षा, अज्ञानता, रोग एवं विविध प्रकार के प्रदूषणों के चक्रवात में फंसा हुयी है। उत्तर प्रदेष का ग्रामीण कृषक ऋण एवं गरीबी में पैदा होता है, और ऋण एवं गरीबी में ही मर जाता हैं। पारिवारिक ऋणग्रस्तता, गरीबी एवं दरिद्रता का परिदृष्य पीढ़ी दर पीढ़ी चला आ रहा हैं। दरिद्रता भावी पीढ़ी को एक विरासत एवं थाथी के रूप में प्राप्त होती हैं। अतः आज उत्तर प्रदेश का ग्रामीण समाज दरिद्रीकरण की प्रताड़नाओं, थपेड़ों एवं झंझावातों को झेलता हुआ येन केन प्रकेणन अपना जीविकोपार्जन कर रहा हैं। प्रस्तुत आलेख का प्रमुख उद्देष्य उत्तर प्रदेष में ग्रामीण विकास के समक्ष उत्पन्न कठिनाइयों का अध्ययन करना है तथा विकास हेतु आवष्यक रणनीतियां सुझाना है।


    Keywords :
    उत्तर प्रदेष, ग्रामीण विकास, रणनीति


    Reference :
    1. Gour, K. (1992). Dynamic of rural development in India, Mittal publication New Delhi, pp-24. 2. Arora, R.U., 2007. Uttar Pradesh –Lagging State of India: Economic Development and Role of Banks. Centre for Development Studies. Auckland. The University of Auckland. 3. Reddy, Ch. (2008). Rural Development India policies and Initiatives, New Century Publications, pp11-58. 4. Govt. of Uttar Pradesh. 2012: Statistic Of Uttar Pradesh 2012. Lucknow. Economic and Statistics Division. 5. Govt. of Uttar Pradesh. 2011: Statistical Abstract 2011. Lucknow. Economic and Statistics Division.

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